April Fool's Day: तो इसलिए 1 अप्रैल को ही मनाया जाता है अप्रैल फूल डे, बड़ा रोचक है इसका इतिहास - Jai Bharat Express | हिंदी न्यूज़ पोर्टल | जबलपुर एवं मध्यप्रदेश की ताज़ा खबरें

Jai Bharat Express  | हिंदी न्यूज़ पोर्टल | जबलपुर एवं मध्यप्रदेश की ताज़ा खबरें

Jai Bharat Express एक हिंदी समाचार पोर्टल है, जहाँ जबलपुर, मध्यप्रदेश, देश, राजनीति, अपराध, प्रॉपर्टी, व्यापार, शिक्षा एवं ताज़ा खबरें प्रकाशित की जाती हैं। निष्पक्ष, विश्वसनीय और तेज़ समाचारों के लिए Jai Bharat Express पढ़ें।

Breaking

April Fool's Day: तो इसलिए 1 अप्रैल को ही मनाया जाता है अप्रैल फूल डे, बड़ा रोचक है इसका इतिहास

 


एक अप्रैल यानी अप्रैल फूल डे जिसे हम मूर्ख दिवस के रुप में भी मनाते हैं. इस दिन लोग एक-दूसरे से मजाक -मस्ती करते हैं.लोग इस दिन मैसेज भेजकर, प्रैंक करने के अलावा और भी कई तरीकों हैं जिनसे लोग एक दूसरे के साथ मजाक करते हैं. कुछ स्थानों पर इसे 'ऑल फूल्स डे' (All Fools' Day) के नाम से भी जाना जाता है.

अलग-अलग देशों में अलग तरीकों से मनाया जाता है मूर्ख दिवस

अप्रैल फूल डे को अलग-अलग देशों में अलग तरीकों से मनाया जाता है. न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में अप्रैल फूल को दोपहर तक मनाया जाता है. जबकि फ्रांस, आयरलैंड, इटली, दक्षिण कोरिया, जापान, रूस, नीदरलैंड, जर्मनी, ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में पूरे दिन मूर्ख दिवस मनाया जाता है.

अप्रैल फूल का इतिहास

मीडिल यूरोप में 25 मार्च को नए साल का उत्सव मनाया जाता है. हालांकि 1852 में पोप ग्रेगरी अष्ठ ने ग्रेगेरियन कैलेंडर की घोषणा की थी. जिसके बाद जनवरी से नए वर्ष की शुरुआत होनी लगी. फ्रांस ने सबसे पहले इस कैलेंडर को स्वीकार किया. लेकिन यूरोप के कई देशों ने इस कैलेंडर को स्वीकार नहीं किया. जिसके कारण नए कैलेंडर के आधार पर न्यू ईयर मनाने वाले लोग पुराने तरीके से अप्रैल में नववर्ष मनाने वाले लोगों को मूर्ख समझने लगे और तब से अप्रैल फूल मनाया जाने लगा.

ये भी है मान्यता

ऐसा कहा जाता है कि पहला अप्रैल फूल डे साल 1381 में मनाया गया था. दरअसल इसके पीछे एक मजेदार वाक्या बताया जाता है. दरअसल, इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी ने सगाई का ऐलान किया था. और इसमें कहा गया कि सगाई के लिए 32 मार्च 1381 का दिन चुना गया है. लोग बेहद खुश हो गए और जश्न मनाने लगे. पर, बाद में उन्हें एहसास हुआ कि ये दिन तो साल में आता ही नहीं. 31 मार्च के बाद 1 अप्रैल को तभी से मूर्ख दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हो गई.