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फेस बुक, वाट्सअप, ट्यूटर पर भड़काउ मैसेज भेजने वाले के खिलाफ अब रास्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई

सोशल नेटवर्किंग साईट पर आपत्तिजनक,भड़काउ पोस्ट डालने वालों के खिलाफ की जायेगी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्यवाही।





सोशल नेटवर्किंग साईट, जैसे फेस बुक, वाट्सअप, ट्यूटर के माध्यम से असामाजिक,विध्नसंतोषी तत्वों द्वारा जातिगत एवं साम्प्रदायिक भावना से सम्बंधित आपत्तिजनक,भड़काउ पोस्ट एवं मैसिज भेजे जाते है, यह एक संज्ञेय अपराध है।


भड़काउ मैसेज भेजने वाले की सूचना तत्काल अपने सम्बंधित थाने को दें ताकि पोस्ट डालने वाले के विरूद्ध विधिसम्मत कार्यवाही की जा सके।


जबलपुर|फेस बुक, वाट्सअप, ट्यूटर पर अब भड़काउ मैसेज भेजने वाले के खिलाफ रास्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जायेगी,इस संबंध में पुलिस अधीक्षक जबलपुर सिद्धार्थबहुगुणा ने संस्कारधानीवासियों से अपील की है, कि जातिगत एवं साम्प्रदायिक भावना से सम्बंधित आपत्तिजनक,भड़काउ पोस्ट एवं मैसिज तथा  वीडियो फुटेज को किसी और से न ही शेयर करें, न ही लाईक करें, कानून एवं शांति व्यवस्था बनाये रखने हेतु संस्कारधानी के एक जिम्मेदार नागरिक का परिचय देते हुये सोशल मीडिया मे पोस्ट की गयी किसी भी पोस्ट की पुष्टि सम्बंधित थाना प्रभारी,नगर पुलिस अधीक्षक,अति. पुलिस अधीक्षक से करते हुये यदि आपको लगता है कि की गयी पोस्ट आपत्तिजनक,भड़काउ है तो इसकी सूचना तत्काल अपने सम्बंधित थाने को दें ताकि पोस्ट डालने वाले के विरूद्ध विधिसम्मत कार्यवाही की जा सके, किसी के बहकावे में आकर अथवा किसी अफवाह के आधार पर एैसा कोई कदम न उठायें जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो।



जबलपुर की सायबर टीम के द्वारा निरंतर निगाह रखी जा रही है। सबंधित थाना प्रभारियो को नियमानुसार कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया हेैं।आपत्तिजनक पोस्ट,वीडियो,फुटेज शेयर करने पर यदि कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हुई तो सम्बंधित के विरूद्ध रास्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्यवाही की जावेगी।


राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) क्या है और इसे क्यों बनाया गया था।



Nation Security Act (एनएसए) राष्ट्रीय सुरक्षा कानून या फिर रासुका एनएसए के तहत ऐसे व्यक्ति को महीनों तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है, जिससे प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और व्यवस्था के लिए खतरा महसूस हो। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से जुड़ा एक कानून है। ये कानून सरकार को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी की शक्ति देता है। सरकार को यदि लगता है कि कोई शख्स देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कामों को करने से उसे रोक रहा है, तो उस शख्स को गिरफ्तार कर सकती है। इस कानून का इस्तेमाल जिला अधिकारी, पुलिस आयुक्त, राज्य सरकार अपने सीमित दायरे में भी कर सकती है। अगर सरकार को लगे कि कोई व्यक्ति बिना किसी मतलब के देश में रह रहा है और उसे गिरफ्तार किए जाने की जरूरत है तो सरकार उसे भी गिरफ्तार करवा सकती है।


National Security Act 


साल 1980 में दोबारा सत्ता में आई इंदिरा गांधी सरकार ने इसे सितंबर 23 को पास करवाया था। बाद में 27 दिसबंर 1980 को ये तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी की मंजूरी के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 के रूप में जाना जाने लगा। 3 महीने की गिरफ्तारी कानून के तहत पहले व्यक्ति को तीन महीने के लिए गिरफ्तार किया जाता है। आवश्यकतानुसार 3-3 महीने के लिए गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाई जा सकती है। गिरफ्तारी के बाद अधिकारी को राज्य सरकार को बताना पड़ता है कि किस आधार पर गिरफ्तारी की गई है। रासुका या एनएसए के तहत किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। हिरासत में लिया गया व्यक्ति सिर्फ हाई कोर्ट के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है। मुकदमे के दौरान रासुका लगे व्यक्ति को वकील की अनुमति नहीं मिलती।