20 फीसद कोविड-19 रिकवर मरीजों में डिस्चार्ज होने के बाद नई मुसीबत का खुलासा, जानिए क्या हैं लक्षण - Jai Bharat Express

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20 फीसद कोविड-19 रिकवर मरीजों में डिस्चार्ज होने के बाद नई मुसीबत का खुलासा, जानिए क्या हैं लक्षण



 हाल ही में एक रिपोर्ट से पता चला है कि कोविड-19 से ठीक हो चुके कुल मरीजों के 20 फीसद को नई समस्या विकसित हुई है. हालांकि, मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज हुए पांच महीने हो चुके हैं. आपको उन लक्षणों की पहचान होने पर पेचीदगी से पहले इलाज कराने का रास्ता साफ होगा.

दुनिया को कोरोना वायरस की गिरफ्त में आए हुए एक साल से ज्यादा हो गए हैं. लेकिन टीकाकरण जारी रहने के बावजूद अभी भी संक्रमित होने का डर और आशंका बरकरार है. पहले से मौजूद संकट को बढ़ाते हुए हाल ही में एक रिपोर्ट से चौंकानेवाला खुलासा हुआ है.


कोविड-19 से ठीक हो चुके मरीजों को 5 महीने बाद भी खतरा
रिसर्च के मुताबिक, कोविड-19 से संक्रमित मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होने के पांच महीने बाद भी पूरी तरह रिकवर नहीं हुए हैं. शोधकर्ताओं ने बताया है कि ठीक हो चुके मरीजों को संक्रमण का नकारात्मक प्रभाव कई तरह से पड़ रहा है. उनका कहना है कि कोविड-19 की बीमारी ने उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाला है.


रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने 1,077 कोविड-19 के मरीजों का विश्लेषण किया, जो हॉस्पिटल से मार्च 2020 और नवंबर 2020 के बीच डिस्चार्ज किए गए थे. रिपोर्ट में बताया गया है कि उनमें से ज्यादातर पूरी तरह ठीक नहीं हुए और उन्हें नई दुश्वारी का सामना करना पड़ा. इसके अलावा, ज्यादातर मरीज अन्य क्रोनिक बीमारी जैसे अस्थमा या डायबिटीज से जूझते पाए गए.


रिकवर मरीजों को क्रोनिक बीमारियों की जताई गई आशंका
मरीजों ने भारी चिंता और डिप्रेशन की शिकायत भी की. एक प्रतिष्ठित अखबार ने डॉक्टर रशेल इवान के हवाले से बताया, "हमारे नतीजे कोविड-19 से डिस्चार्ज होने के 5 महीनों बाद भी लक्षणों के बड़े बोझ की शक्ल में मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा अंग के नुकसान को जाहिर करते हैं."


ठीक हो चुके मरीज स्वास्थ्य की कुछ अन्य पेचीदिगयों में कॉग्निटिव फंक्शन के खराब होने, ब्रेन फॉग से पीड़ित पाए गए. गौरतलब है कि दिमाग से जुड़ी दिक्कतों को चिकित्सक ब्रेन फॉग यानी दिमाग का धुंधला होना मानते हैं. लिहाजा, रिकवर मरीजों को कई क्रोनिक बीमारियों से पीड़ित होने के खतरे को देखते हुए जरूरी है लक्षणों की पहचान की जाए. ये लक्षण कुछ अन्य बीमारियों से कभी-कभी बिल्कुल मिलते जुलते नजर आते हैं.


तेज मांसपेशी में दर्द- लंबे समय तक तेज मांसपेशी में दर्द से पीड़ित होना चिंता का विषय हो सकता है. विशेषकर कोविड-19 से ठीक हो चुके मरीजों को निगरानी रखनी चाहिए कि कहीं उन्हें लगातार मांसपेशी में दर्द तो नहीं हो रहा है.


अत्यधिक थकान- थकान बहुत महत्वपूर्ण लक्षण है. इससे हाल ही में वायरस के संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के बीच कोविड-19 की पुनरावृत्ति का पता चल सकता है.


थोड़े अरसे की याद्दाश्त का नुकसान- ठीक हो चुका मरीज याद्दाश्त के नुकसान की समस्याओं से भी पीड़ित हो सकता है. इस विशेष लक्षण पर करीब से ध्यान रखें क्योंकि कुछ लोगों के लिए ये घातक साबित हो सकता है.


स्मरण शक्ति की कमी- एक शख्स कोविड-19 के इलाज के बाद धीमी स्मरण शक्ति से भी पीड़ित हो सकता है. उस शख्स की सोचने की शक्ति भी प्रभावित हो सकती है. ऊपर बताए गए लक्षणों के अलावा बदन दर्द, पुराना सिर दर्द, सांस कीा मुद्दा भी देखने को मिल सकता है.