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AstraZeneca Vaccine: भारत में नहीं ब्लड क्लॉटिंग का एक भी केस, अधिकारियों ने किया दावा


 

कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी से बुरी तरह परेशान दुनिया के कई दशों में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन (AstraZeneca’s Vaccine) को लेकर सवाल उठ रहे हैं. एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लेने के बाद मरीजों में ब्लड क्लॉट (Blood Clots) के मामले सामने आए हैं. हालांकि भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन के अभियान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि भारत ने वैक्सीन से ब्लड क्लॉटिंग का एक भी केस सामने नहीं आया है. हालांकि अधिकारियों ने ये भी कहा है कि वैक्सीन लगने के बाद के प्रभावों की जांच के लिए अगले हफ्ते रिव्यू किया जाएगा.

ये बयान ऐसे समय में सामने आया है जब डेनमार्क (Denmark), नॉर्वे और इटली समेत छह मुल्कों ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के प्रयोग पर रोक लगा दी है. अब वैक्सीन के दुष्प्रभावों की जांच शुरू कर दी गई है. वहीं WHO का कहना है कि ये वैक्सीन इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है.

वहीं एईएफआई पर कोविड -19 टीकाकरण समिति की राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सदस्य डॉ एनके अरोड़ा ने कहा है कि भारत में ब्लड क्लॉटिंग का एक भी मामला नही हैं लेकिन फिर भी भारत के आंकड़ों को बहुत सावधानी से जांचने का फैसला लिया गया हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय इस जांच के लिए अगले देशभर से AEFI डाटा देगा. इसी मामले पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को राज्य स्तर पर एईएफआई समितियों के नोडल अधिकारियों के साथ एक अलग बैठक की थी.

इससे पहले डेनमार्क के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि कुछ मरीजों में वैक्सीन लगने के बाद ब्लड क्लॉट देखने को मिले हैं, इसलिए एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के प्रयोग को फिलहाल रोक दिया गया है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक बयान जारी कर कहा, यह कदम एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन को लगाने के बाद लोगों में ब्लड क्लॉट के गंभीर मामलों की रिपोर्ट आने पर उठाया गया है. हालांकि, बयान में सावधानीपूर्वक ये जरूर कहा गया कि अभी यह निर्धारित नहीं किया गया है कि वैक्सीन और ब्लड क्लॉट के बीच एक कड़ी है. लेकिन जांच जारी है.

वहीं यूरोप की मेडिसिन वॉचडॉग ‘यूरोपियन मेडिकल एजेंसी’ (EMA) ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का बचाव करते हुए कहा था कि शुरुआती जांच से पता चला है कि ऑस्ट्रिया में उपयोग किए गए एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के बैच को संभवतः नर्स की मौत के लिए दोषी नहीं ठहराया गया. EMA ने बताया कि 9 मार्च तक यूरोपियन इकोनॉमिक एरिया में 30 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई गई. इनमें से केवल 22 लोगों में वैक्सीन लगने के बाद ब्लड क्लॉट के मामले देखने को मिले.