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Call Record कर रहे हैं mobile पर तो हो सकती हैं जेल. कोर्ट में सबूत भी गलती से मत दे दीजिएगा रिकॉर्डिंग का

अगर कोई आपके फोन कॉल को रिकॉर्ड करता है तो आप कर सकते है उस पर कानूनी कार्यवाही। क्योंकि बगैर अनुमति किसी की भी कॉल रिकॉर्ड करना है कानूनी अपराध।




नई दिल्ली | नहीं कर सकते हैं किसी की भी कॉल रिकॉर्ड,काॅल रिकाॅर्डिंग अपराध है, निजता के अधिकार का उल्लंघन है, बगैर अनुमति किसी की काॅल रिकाॅर्डिंग अपराध है। ऐसा करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 21 के अंतर्गत दिए गए निजता के मूल अधिकार के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।


अगर कोई आपके फोन कॉल को रिकॉर्ड करता है तो आप कर सकते है उस पर कानूनी कार्यवाही। क्योंकि बगैर अनुमति किसी की भी कॉल रिकॉर्ड करना कानूनी अपराध है, ऐसा करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 21 के अंतर्गत दिए गए निजता के मूल अधिकार के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।


कुछ विशेष मामलों में सरकार को काॅल रिकाॅर्ड का अधिकार



काॅल रिकाॅर्डिंग अपराध है एवं निजता के अधिकार का उल्लंघन है। लेकिन केंद्र एवं राज्य सरकारों के पास कुछ विशेष मामलों में काॅल रिकाॅर्ड का अधिकार है। यह अधिकार उन्हें इंडियन टेलीग्राफ एक्ट -1885 के सेक्शन 5 (2) में प्रदान किया गया है।


इसके तहत यदि किसी सरकारी विभाग मसलन पुलिस अथवा आयकर विभाग आदि को लगता है कि कानून का उल्लंघन हो रहा है। अथवा उन्हें ऐसा लगता है कि जन सुरक्षा एवं राज्य के हित में किसी की बातचीत को गोपनीय तरीके से रिकाॅर्ड करने की आवश्यकता है तो वे ऐसा कर सकते हैं।


केवल इस स्थिति में हो सकता हैं कॉल रिकॉर्ड


कुछ विशेष मामलों में कॉल रिकॉर्डिंग अपराध नहीं माना गया है। ऐसा उन स्थितियों में है, जहां यदि सार्वजनिक आपात अथवा लोकसुरक्षा के लिए कॉल रिकॉर्ड किया जाना आवश्यक हो। ऐसी स्थिति में इसे अपराध नहीं माना गया है। किंतु ऐसा करने के लिए सक्षम संस्था की अनुमति आवश्यक है।


कॉल रिकॉर्डिंग को लेकर है ये क़ानून


निजता का अधिकार संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए प्राण व दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार मे सम्मिलित है। इस संबंध मे पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज वर्सेस यूनियन आफ इंडिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीफोन टेप करने को व्यक्ति के निजता के अधिकार में सीधा हस्तक्षेप करार दिया था।

कोर्ट ने बताया था अधिकार


रचाला एम भुवनेश्वरी Vs नाफंदर रचाला के मामले में पति की ओर से दायर विवाह विच्छेद याचिका में पति ने कोर्ट में पत्नी की उसके माता-पिता एवं दोस्त की बातचीत से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग पेश की थी। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद- 21 के अंतर्गत इसे पत्नी के निजता के अधिकार का उल्लंघन माना।