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हाईकोर्ट ने कहा: फीस न भरने पर बच्चों को नहीं निकाल सकते निजी स्कूल

जबलपुर. कोरोना संकटकाल में भी निजी स्कूलों की मनमानी अभी भी जारी है, निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों को फीस को लेकर दबाव बनाया जा रहा है, जिसपर हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों पर नाराजगी जताई है, हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी स्कूल फीस न भरने की स्थिति में बच्चों को बेदखल नहीं कर सकता है. 
बताया जाता है कि मध्यप्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली को लेकर सीबीएसई बोड ने अब तक हाईकोर्ट में जबाव पेश नहीं किया है, जिसके चलते हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रवैया अपनाते हुए सीबीएसई बोर्ड को जबाव पेश करने की अंतिम मोहलत दे दी है, जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीएसई से सभी पक्षकारों को 24 अगस्त तक अपना जबाव पेश करना है, हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि आगामी आदेश तक अंतरिम आदेश को जारी रखा जाएगा, इसके तहत प्रदेश में कोई भी स्कूल अभिभावकों द्वारा फीस न भर पने पर अपने स्कूल से किसी भी बच्चों को बाहर नहीं कर सकता है.
वहीं आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से संशोधन आवेदन भी पेश किया गया है, जिसमें राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया है कि ट्यूशन फीस और ऑनलाइन पढ़ाई का टाइम टेबल तय किया जाना चाहिए. गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण काल में एक लोगों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है, वहीं निजी स्कूलों द्वारा फीस को लेकर दबाव बना रहे है. 
गोलबाजार स्थित स्कूल से वाट्स पर भेजे जा रहे मैसेज-
चर्चाओं के दौरान यह बात भी सामने आई है कि गोलबाजार स्थित निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा कहने के लिए ऑन लाइन पढ़ाई कराई जा रही है, वास्तविकता यह है कि वाट्सएपर वार्षिक शुल्क व ट्यूशन फीस को लेकर मैसेज भेजकर दबाव बनाया जा रहा है, पिछले एक महीने में छात्र व उनके अभिभावकों को लगातार मैसेज कर रुपयों की मांग की जा रही है, यहां तक कि कहा गया कि बोर्ड परीक्षाओं में बैठने नहीं दिया जाएगा, खासबात तो यह है कि इस स्कूल के कर्ताधर्ता सत्ताधारी पार्टी व आरएसएस के प्रमुख पदाधिकारी भी है. स्कूल के अधिकतर छात्रों से हर वर्ष वसूली जाने वाली भारी भरकम फीस दबाव देकर ले ली गई है, अब ट्यूशन फीस को लेकर दबाव बनाया जा रहा है.