जम्मू-कश्मीर के बडगाम में तैनात पटवारी को CBI ने रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा - Jai Bharat Express

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जम्मू-कश्मीर के बडगाम में तैनात पटवारी को CBI ने रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा


 

जम्मू कश्मीर में सीबीआई ने एक तैनात पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. उसे विशेष कोर्ट के सामने पेश किया गया जहां पूछताछ के लिए 3 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया गया है.

सीबीआई ने आज जम्मू कश्मीर के बडगाम में तैनात मोहम्मद अफजल नाम के पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. आरोप है कि जमीन के दस्तावेज उसके मालिक के नाम करने के बदले मोहम्मद अफजल ₹35 हजार रूपये की रिश्वत मांग रहा था. गिरफ्तारी के बाद पटवारी मोहम्मद अफजल को सीबीआई की विशेष कोर्ट के सामने पेश किया गया जहां से उसे पूछताछ के लिए 3 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया गया है.

सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी के मुताबिक मामला जम्मू कश्मीर की बडगाम स्थित बेमिना इलाके का है. शिकायतकर्ता ने सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में शिकायत की थी कि उसकी जमीन उसके नाम करने के बदले पटवारी अफजल ₹35000 की रिश्वत मांग रहा है. जब उसने यह रकम देने में असमर्थता जाहिर की तो पटवारी ने उसका काम करने से मना कर दिया. इसके बाद शिकायतकर्ता ने फिर पटवारी से बात की और पटवारी ने उससे कुल ₹23000 की डील की इसमें 10 हजार रुपए पटवारी ने ले भी लिए और उससे बाकी के पैसे लाने को कहा.


सीबीआई ने बिछाया जाल


सूचना के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाया और रिश्वत ले रहे पटवारी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी के मुताबिक इसके बाद पटवारी अफजल के ठिकानों पर छापेमारी की गई जहां से सीबीआई को अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं जिनकी जांच का काम जारी है. सीबीआई ने गिरफ्तार सरकारी अधिकारी को सीबीआई की विशेष कोर्ट के सामने पेश किया जहां से उसे पूछताछ के लिए 3 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया गया है.


सीबीआई जानना चाहती है कि जम्मू कश्मीर में पटवारियों के रिश्वत लिए जाने का है. यह जाल किस कदर फैला हुआ है और इसमें बड़े अधिकारियों की कितनी भूमिका है. यही कारण है कि पटवारी को पूछताछ के लिए रिमांड पर लाया गया है. सीबीआई को उम्मीद है कि पटवारी से पूछताछ के दौरान अनेक हम खुलासे हो सकते हैं मामले की जांच जारी है.


ध्यान रहे कि जम्मू कश्मीर के यूनियन टेरिटरी बनने के पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो इस तरह की छापेमारी नहीं कर पाता था जिससे आम जनता को मजबूरन रिश्वत की रकम देनी ही पड़ती थी. यह भी आरोप लगते रहे थे कि तत्कालीन राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ऐसे मामलों में कार्यवाही नहीं करता था जिसके चलते लोग वहां शिकायत करने से भी बचने लगे थे. इसके अलावा यदि कोई शख्स शिकायत करता था तो उसे यह भी धमकाया जाता था कि जहां शिकायत करनी है कर लो कुछ नहीं हो पाएगा. अब जम्मू कश्मीर के यूनियन टेरिटरी बनने के बाद केंद्र ऐसे ही सारे मिथकों को तोड़ना चाहता है जिससे आम जनता को जबरन रिश्वत की रकम अदा करनी पड़े.