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11 साल का साथ, तीन संतानें – जीवन की उलझी दास्तां या न्याय की डगर?

 

बिलासपुर की एक सक्रिय एनजीओ कर्मी का जीवन एक अनकही दास्तां में बदल गया जब 2008 में उसने एक युवक से मुलाकात की। युवक ने उसे एक किराए का घर दिलवाया और दोनों ने बिना विवाह के पति-पत्नी का रूप धारण कर लिया। 11 वर्षों तक साथ रहने के बाद, जिन तीन संतानों ने उनके मिलन की पुष्टि की, युवक के अचानक रायपुर चले जाने से महिला के मन में सवाल उठने लगे।

उसने आरोप लगाया कि युवक ने शादी का झांसा देकर अपने पक्ष में संबंध बनाए। इस आरोप के आधार पर महिला ने रेप का केस दर्ज कराया। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगर महिला ने इतने समय तक युवक को अपना जीवनसाथी माना, तो यह कथन करना कि संबंध असहमत या धोखे से स्थापित हुए, न्यायिक समझ के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पुष्टि के साथ आरोपी को बरी कर दिया गया। इस घटना से न केवल व्यक्तिगत संबंधों के मायने बदल गए हैं, बल्कि सामाजिक मानदंडों और कानून के बीच संतुलन11 साल साथ रहने के बाद क्या शादी का झांसा? कोर्ट ने क्या कहा?

रामगढ़ के चक्रधर इलाके में एक महिला ने युवक पर शादी का झांसा देने का आरोप लगाया था, लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने यह अहम टिप्पणी की कि अगर महिला और आरोपी लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं, और महिला ने युवक को अपना पति माना, तो इसे धोखे में रखना या यौन शोषण के रूप में नहीं देखा जा सकता।


 पर भी प्रश्न खड़े हो गए हैं।