चंबा से लेकर शिमला तक, और किन्नौर से लाहौल-स्पीति तक, बारिश की मार हर जिले में देखी जा सकती है। 37 सड़कों का बंद होना केवल यातायात की रुकावट नहीं, बल्कि ज़िंदगी के रुकने की तस्वीर है। बिजली ठप, पानी की सप्लाई ध्वस्त — राहत कार्य शुरू हैं, लेकिन जनता के आंसू थमे नहीं। हिमाचल में प्रकृति का कोप: पहाड़ों के आंसू पोंछने कब आएगी सरकार?
लोग अपने घरों से बेघर हो चुके हैं, कई जगहों पर शव ढूंढे नहीं जा सके हैं। सिर्फ चार लोग लापता नहीं, बल्कि सैकड़ों अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित हैं। बच्चों के स्कूल बंद, बिजली गुल, और पीने का पानी नदारद — सवाल यह है कि क्या हर साल ऐसे ही बरसात के साथ हम ‘तैयार नहीं’ की त्रासदी झेलते रहेंगे?