शिक्षा सुधार की हर रणनीति तब धरी रह जाती है जब शिक्षकों में जवाबदेही का अभाव हो। बलौदा बाजार में हाल ही में BEO के निरीक्षण से साफ हुआ कि स्कूलों में अनुशासन ढीला है।
पुस्तक वितरण अधूरा है, शिक्षक देरी से पहुंच रहे हैं, और मिड-डे मील की स्थिति भी खराब। इन सब पर ‘स्पष्टीकरण’ और ‘कारण बताओ नोटिस’ का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन क्या यह स्थायी समाधान है?
प्रशासन ने चेतावनी दी है, मगर ज़रूरत है ऐसी निगरानी को सतत और कठोर बनाने की।
वरना ‘नया सत्र’ भी पुरानी लापरवाहियों के नीचे दब जाएगा।