इंस्टाग्राम पर दोस्ती, शादी का झांसा और फिर बेरहमी से हत्या — इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया की नैतिकता ही नहीं, पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुनीता और उसका बेटा 18 जून को लापता हो गए, परिजनों ने अगली सुबह ही गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मगर न कोई सर्च ऑपरेशन, न कॉल डिटेल्स की जांच, न सीसीटीवी खंगाले गए।
22 जून को जब अमलेश्वर में कुएं से दुर्गंध आई, तब पुलिस हरकत में आई और सड़ी-गली लाशें निकाली गईं। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर पुलिस शुरू से सक्रिय रहती तो शायद इन दोनों की जान बचाई जा सकती थी।