क्या कांग्रेस ने एक मासूम युवक की पीड़ा को राजनीतिक औजार बना दिया?
प्रदेश की राजनीति में हलचल तब बढ़ी जब गजराज लोधी नामक युवक ने खुद स्वीकार किया कि मल खिलाने का आरोप उसने कांग्रेस नेताओं के कहने पर सरपंच पर लगाया था।
गजराज का दावा है कि उसे जीतू पटवारी के निर्देश पर झूठ बोलने को कहा गया और पैसे भी दिए गए।
पटवारी पर अब FIR दर्ज हो चुकी है, लेकिन वे पलटवार में कह रहे हैं – “अगर किसानों और दलितों की आवाज़ उठाना अपराध है, तो मैं ये अपराध करता रहूंगा।”
बीजेपी ने इसे "प्रदेश की छवि बिगाड़ने की साजिश" बताया है।
सवाल है — क्या यह मामला दलित उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई थी या सत्ता की होड़ में गढ़ी गई एक झूठी पटकथा?