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: एक समाज की खामोश बेचैनी की दास्तान


मुस्लिम धर्मगुरु डॉ. मुसाहिद रजा के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पत्र कोई साधारण अपील नहीं, बल्कि एक समुदाय की गहराती असुरक्षा का प्रतिबिंब है।

पत्र में NRC, CAA और NPR के संदर्भ में जिस “भविष्य की आशंका” को दर्शाया गया है, वह मुस्लिम समुदाय की बेचैनी को उजागर करता है।

बयान में खासतौर से “काल करे सो आज कर, नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज़ तैयार करें” जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं।
बर्थ सर्टिफिकेट से लेकर बिजली का बिल, निकाहनामा से लेकर बैंक पासबुक — हर कागज़ की दुरुस्ती की अपील एक गहरे अविश्वास का संकेत है।

सवाल यह नहीं कि NRC लागू होगा या नहीं, सवाल यह है कि समाज के एक हिस्से को क्यों लग रहा है कि उन्हें अपनी ‘भारतीयता’ बार-बार साबित करनी पड़ेगी?