जबलपुर के घाटों पर नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी, प्रशासन कब जागेगा? सब कुछ देखकर भी खामोश क्यों? ग्वारीघाट में नियम तोड़ते युवाओं पर कार्रवाई का इंतजार - Jai Bharat Express | हिंदी न्यूज़ पोर्टल | जबलपुर एवं मध्यप्रदेश की ताज़ा खबरें

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जबलपुर के घाटों पर नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी, प्रशासन कब जागेगा? सब कुछ देखकर भी खामोश क्यों? ग्वारीघाट में नियम तोड़ते युवाओं पर कार्रवाई का इंतजार

जबलपुर के ग्वारीघाट और अन्य नर्मदा तटों पर युवाओं द्वारा नियमों की अनदेखी और नशे की बढ़ती घटनाओं पर स्थानीय लोगों की चिंता बिल्कुल जायज है,नशे के अवैध कारोबार पर नकेल कसने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार अभियान चला रहे हैं, जिसके तहत हाल ही में भारी मात्रा में नशीले इंजेक्शन और डोडा-चूरा बरामद किए गए हैं।


लोग कहते हैं कि यह नजारा अब आम हो चुका है। सवाल यह नहीं कि ऐसी गतिविधियां हो रही हैं, सवाल यह है कि इन्हें रोकने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा ?


सब कुछ देखकर भी खामोश क्यों? ग्वारीघाट में नियम तोड़ते युवाओं पर कार्रवाई का इंतजार।


✍️ जय भारत एक्सप्रेस | जबलपुर समाचार

जबलपुर के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थलों ग्वारीघाट और जिलहरी घाट में इन दिनों एक चिंताजनक तस्वीर देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल और कॉलेज के कई छात्र खुलेआम गांजा और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। शाम होते ही घाटों के सुनसान हिस्सों में युवाओं के समूह जमा होते हैं, जिससे धार्मिक वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।


नशे की बढ़ती लत युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने की उम्र में कई युवक नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नशा न केवल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है बल्कि अपराध और सामाजिक समस्याओं को भी बढ़ावा देता है। 


जबलपुर पुलिस लगातार नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। हाल ही में शहर में नशीले इंजेक्शनों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था, वहीं गांजा तस्करी के कई मामलों में भी गिरफ्तारियां हुई हैं। 


स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि ग्वारीघाट और जिलहरी घाट क्षेत्रों में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, सीसीटीवी निगरानी मजबूत की जाए और स्कूल-कॉलेजों में नशा मुक्ति जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि युवाओं को इस दलदल में जाने से रोका जा सके।


ग्वारीघाट क्षेत्र में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। बड़ी संख्या में युवा दोपहिया वाहनों पर तीन-तीन सवारी बैठाकर रैली के रूप में सड़कों पर निकलते हैं। तेज रफ्तार, स्टंटबाजी और यातायात नियमों की अनदेखी न केवल उनकी जान के लिए खतरा है, बल्कि अन्य राहगीरों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों पर सख्ती जरूरी है ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।


ग्वारीघाट और जिलहरी घाट आने वाले कई लोगों का कहना है कि ऐसी गतिविधियां कोई नई बात नहीं हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, नशाखोरी, तीन सवारी और यातायात नियमों के उल्लंघन की घटनाएं लंबे समय से देखने को मिल रही हैं। अब सवाल यह है कि युवा पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल रही इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक कब लगेगी?



लोग कहते हैं कि यह नजारा अब आम हो चुका है। सवाल यह नहीं कि ऐसी गतिविधियां हो रही हैं, सवाल यह है कि इन्हें रोकने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा?