क्राइस्ट चर्च बॉयज़' सीनियर सेकेंडरी स्कूल (जबलपुर) के छात्रों से स्कूल परिसर में घास उखड़वाने और काम के दौरान एक छात्र को सांप द्वारा काटे जाने की घटना बेहद गंभीर है। इस स्थिति में कानूनी और नैतिक रूप से स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्य (Principal) पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं।
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, जोखिम भरे कार्य कराने के लिए नहीं। शिक्षा संस्थानों की पहली जिम्मेदारी बच्चों की सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना है।
MP- जबलपुर। शहर के तैयब अली क्राइस्ट चर्च बॉयज' सीनियर सेकेंडरी स्कूल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि स्कूल परिसर में छात्रों से घास उखड़वाने का काम कराया जा रहा था। इसी दौरान एक छात्र को सांप ने काट लिया। घटना के बाद अभिभावकों में आक्रोश है और स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्कूल का काम बच्चों से मजदूरी या सफाई कराना है, या उन्हें सुरक्षित वातावरण में शिक्षा देना?
यदि बच्चों से वास्तव में मैदान या परिसर की घास उखड़वाई जा रही थी, तो यह न केवल उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी का भी गंभीर विषय है। जिस स्थान पर घास और झाड़ियां हों, वहां सांप और अन्य जहरीले जीव होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में बच्चों से यह कार्य कराना कितना उचित है?
घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—
- बच्चों से घास उखड़वाने का आदेश किसने दिया?
- क्या स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए थे?
- छात्र को सांप काटने के बाद तत्काल क्या कार्रवाई की गई?
- यदि इस घटना में छात्र की जान चली जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, जोखिम भरे कार्य कराने के लिए नहीं। शिक्षा संस्थानों की पहली जिम्मेदारी बच्चों की सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी स्कूल में बच्चों का इस तरह शोषण या उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ न हो।
जय भारत एक्सप्रेस इस मामले की निष्पक्ष जांच और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करता है। शिक्षा का मंदिर बच्चों के भविष्य का निर्माण करे, न कि उन्हें जोखिम में डाले।
