करीब 4 साल तक सीएमएचओ की जिम्मेदारी संभालने वाले डॉ. संजय मिश्रा अब इस घोटाले में घिर गए हैं। जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए भोपाल भेजी जा चुकी है, जिससे आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।
MP -जबलपुर | 93 लाख के फर्जी देयकों के भुगतान मामले में राज्य शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा को निलंबित कर दिया है।फर्जी बिलों के जरिए हुए करोड़ों के घोटाले की जांच आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंची और इसकी आंच अब सीधे जबलपुर के सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा तक जा पहुंची। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
फर्जी बिलों के जरिए दिखाया भुगतान
दरअसल, सीएमएचओ कार्यालय में फर्जी देयकों के माध्यम से भुगतान किए जाने की शिकायतों के बाद जांच शुरू की गई थी। डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी के नेतृत्व में गठित टीम ने पाया कि भोपाल की एक निजी कंपनी को 12 फर्जी बिलों के जरिए करीब 93.04 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि संबंधित सामग्री कभी प्राप्त ही नहीं हुई।
बता दें की देयक भुगतान की शिकायत कि सत्यता की जांच के लिए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा जांच दल गठित किया था। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में घोटाले को सही पाया और उक्त मामले में सीएमएचओ पर भुगतान रिपोर्ट को अनदेखा करने का आरोप लगाया। कलेक्टर श्री सिंह के प्रतिवेदन के आधार भोपाल मुख्यालय से निलंबन आदेश जारी किए गए। इस पूरे मामले में सरकारी खजाने को करोडों रुपये की चपत लगाने के साथ ही महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के गायब होने की पुष्टि हुई है। जांच में पाया गया कि विभागीय स्तर पर वित्तीय नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई और बिना सामग्री प्राप्त किए ही निजी कंपनियों को भुगतान कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में फर्जी देयक लगाकर भुगतान किये जाने के प्रकरण में दोषी पाये जाने पर स्टोर कीपर का दायित्व संभाल रहे फार्मासिस्ट नीरज कौरव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। वही इसी मामले में संविदा आधार पर नियुक्त जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी एवं फार्मासिस्ट जवाहर लोधी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से हटाकर जांच पूरी होने तक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सिहोरा में पदस्थ किया है।
एसडीएम मरावी ने कि थी जांच
बता दें की कलेक्टर श्री सिंह द्वारा फर्जी देयकों के माध्यम से साईनेज निर्माण तथा स्वास्थ्य केन्द्र सामग्री के नाम से भोपाल की निजी कंपनी को बिना सामग्री प्राप्त हुए भुगतान किये जाने की शिकायतें प्राप्त होने पर डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी के नेतृत्व में जांच दल गठित किया था। जिसने अपनी जांच में उक्त मामले में सभी दोषी की संलिप्तता पाई थी।
जांच में पाया गया था 12 फर्जी देयकों के माध्यम से भोपाल की सिंह एंटरप्राइजे़ज को साइनेज एवं स्वास्थ्य केन्द्र सामग्री के नाम से 93 लाख 04 हजार 998 रूपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि, भौतिक रूप से यह सामग्री प्राप्त ही नहीं हुई थी।
राघवेंद्र सिंह कलेक्टर जबलपुर
बगैर सामग्री क्रय किए ही इतनी बडी राशि का भुगतान करने की गड़बड़ी की जांच मैने स्वयं करवाई थी। जिसमें सीएमएचओ संजय मिश्रा फार्मासिस्ट आदि दूसरे अन्य कर्मचारी की* *मिलभीगत सामने आई थी। जांच में सामग्री क्रय करने के बाद भुगतान करने की प्रक्रिया की अनदेखी के आरोप भी स्पष्ट दिख रहे है। इसलिए सभी दोषी के खिलाफ सख्त एक्शन लिए गया है।



