राम मंदिर को देश-विदेश के श्रद्धालुओं से भारी मात्रा में सोना-चांदी और नकदी दान में मिली है। मंदिर ट्रस्ट (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र) के महासचिव चंपत राय के अनुसार, राम मंदिर को अब तक लगभग 940 किलोग्राम (लगभग 9.4 क्विंटल) चांदी का दान मिल चुका है।
अयोध्या के राम मंदिर में दान के रूप में मिले सोने-चांदी के गहनों, ईंटों और नकदी में कथित हेराफेरी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दानदाताओं और श्रद्धालुओं ने मंदिर ट्रस्ट से चढ़ावे और दान का पूरा हिसाब मांगा है।
गायब हुए कीमती सामान: श्रद्धालुओं और मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर आंदोलन के समय से दान में मिली करीब 1,000 सोने-चांदी की शिलाएं (ईंटें) और हाल ही में महाकुंभ के दौरान भक्तों द्वारा चढ़ाए गए कीमती चांदी के हार व अन्य आभूषण गायब हैं या उनका रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है।
एसआईटी जांच : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की जांच कर रही है। एसआईटी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों, कर्मचारियों और कैश-काउंटिंग से जुड़े लोगों से पूछताछ की है।
कर्मचारियों पर कार्रवाई: नोट और गहनों की गिनती करने वाले कुछ कर्मचारियों पर हेरफेर का संदेह है। जांच के दौरान संदिग्ध कर्मचारियों से लाखों रुपये नकद और महंगी वस्तुएं बरामद होने की खबरें सामने आई हैं।
अयोध्या/मुंबई। राम मंदिर निर्माण के लिए वर्षों से देशभर के श्रद्धालुओं ने खुले मन से दान दिया। किसी ने नकद राशि दी तो किसी ने सोना-चांदी और बहुमूल्य वस्तुएं भेंट कीं। अब कुछ दानदाताओं द्वारा दान में दी गई चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के उपयोग एवं रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मुंबई के कारोबारी अनिल विश्वकर्मा का दावा है कि उन्होंने राम मंदिर के लिए लगभग 3 किलोग्राम चांदी का हार और 1 किलोग्राम चांदी की चरण पादुका दान स्वरूप सौंपी थी। उनका आरोप है कि उन्हें वस्तुओं के उपयोग, फोटो अथवा रसीद संबंधी कोई जानकारी अब तक प्राप्त नहीं हुई है।
इसी तरह वर्ष 2020 में इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स से जुड़े संगठनों द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए चांदी की ईंटें दान किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। उस समय यह कहा गया था कि चांदी की ईंटें मंदिर निर्माण और भूमि पूजन से जुड़े कार्यक्रमों में उपयोग की जाएंगी।
हालांकि राम मंदिर ट्रस्ट पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि बड़ी मात्रा में प्राप्त सोना-चांदी और बहुमूल्य धातुओं के भंडारण तथा सत्यापन की व्यावहारिक चुनौतियां हैं। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से बहुमूल्य धातुओं के बजाय बैंकिंग माध्यम से दान देने की अपील भी की थी।
वहीं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूमि पूजन के दौरान उपयोग की गई चांदी की ईंटों को बाद में सुरक्षित रखने और मंदिर निर्माण के लिए धन में परिवर्तित करने की बात भी सामने आई थी।
फिलहाल दान में दी गई विशेष वस्तुओं के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दानदाताओं की मांग है कि ट्रस्ट दान में प्राप्त बहुमूल्य वस्तुओं का विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक करे ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या विवाद की स्थिति समाप्त हो सके।
इस पूरे मामले में ट्रस्ट का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
ट्रस्ट का रुख: मंदिर ट्रस्ट ने अभी तक किसी भी अनियमितता से इंकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर में नियमित रूप से ऑडिट हो रहा है और बैंक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सभी चढ़ावों का रिकॉर्ड रखा जाता है।

