रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में जमीन और मकानों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी के बाद अब खरीदार इंतजार की मुद्रा में हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घर खरीदना पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है, वहीं बैंक ऋण की बढ़ती ईएमआई भी लोगों के फैसले को प्रभावित कर रही है।
MP - जबलपुर। कभी निवेशकों और घर खरीदने वालों की पहली पसंद रहा जबलपुर का रियल एस्टेट बाजार इन दिनों सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। शहर में जमीन, प्लॉट और मकानों की खरीदी-बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालात यह हैं कि प्रॉपर्टी देखने और जानकारी लेने वालों की संख्या तो बनी हुई है, लेकिन सौदे अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में जमीन और मकानों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी के बाद अब खरीदार इंतजार की मुद्रा में हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घर खरीदना पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है, वहीं बैंक ऋण की बढ़ती ईएमआई भी लोगों के फैसले को प्रभावित कर रही है।
जबलपुर में रियल एस्टेट बाजार की सुस्ती का सबसे ज्यादा असर प्रॉपर्टी ब्रोकरों पर पड़ रहा है। एक समय था जब दिनभर में कई ग्राहकों को प्लॉट और मकान दिखाने वाले एजेंट अब खरीदारों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। कई ब्रोकरों का कहना है कि पहले महीने में 3 से 5 डील आसानी से हो जाती थीं, लेकिन अब कई-कई महीने तक एक भी सौदा नहीं हो रहा।
प्रॉपर्टी एजेंटों के अनुसार लोग प्रॉपर्टी देखने तो आ रहे हैं, लेकिन बढ़ती कीमतों और आर्थिक अनिश्चितता के कारण खरीदारी का फैसला टाल रहे हैं। इसका सीधा असर एजेंटों की आय पर पड़ा है, क्योंकि उनकी कमाई पूरी तरह कमीशन पर निर्भर होती है।
शहर के कई छोटे ब्रोकरों का कहना है कि प्रॉपर्टी बाजार की मंदी ने उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा कर दिया है। मकान का किराया, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है। कुछ एजेंट तो अतिरिक्त आय के लिए दूसरे काम भी तलाश रहे हैं।
रियल एस्टेट कारोबारियों का मानना है कि बाजार में फिर से रौनक लौटने पर सबसे बड़ी राहत इन्हीं ब्रोकरों और छोटे प्रॉपर्टी कारोबारियों को मिलेगी, जिनकी आजीविका सीधे तौर पर खरीदी-बिक्री पर निर्भर है।
निवेशकों का घटा रुझान
एक समय था जब निवेशक प्लॉट और जमीन में पैसा लगाना सबसे सुरक्षित मानते थे, लेकिन अब निवेश के अन्य विकल्पों की ओर उनका रुझान बढ़ा है। इसके चलते कई नई टाउनशिप और आवासीय परियोजनाओं में अपेक्षित बुकिंग नहीं हो पा रही है।
रजिस्ट्री कार्यालयों में भी असर
रियल एस्टेट बाजार की सुस्ती का असर पंजीयन विभाग पर भी दिखाई दे रहा है। कारोबारियों का दावा है कि पहले की तुलना में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की रफ्तार धीमी हुई है। हालांकि सरकारी आंकड़े आने के बाद ही इसकी वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर
शहर के बाहरी इलाकों में विकसित हो रही नई कॉलोनियों और बड़े प्लॉट प्रोजेक्ट्स में खरीदारों की कमी अधिक महसूस की जा रही है। वहीं विकसित और व्यावसायिक क्षेत्रों में मांग अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।
क्या फिर लौटेगी तेजी?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंक ऋण की शर्तों में राहत मिलती है और बाजार में आर्थिक विश्वास बढ़ता है तो आने वाले त्योहारों और विवाह सीजन में प्रॉपर्टी बाजार फिर गति पकड़ सकता है। फिलहाल खरीदार कीमतों में स्थिरता या कमी का इंतजार कर रहे हैं।
बाजार की स्थिति एक नजर में
• प्लॉट और मकानों की बिक्री में गिरावट
• पूछताछ अधिक, सौदे कम
• बढ़ी कीमतों से खरीदारों की दूरी
• निवेशकों का रुझान कमजोर
• त्योहार सीजन से कारोबारियों को उम्मीद
स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि जबलपुर का प्रॉपर्टी बाजार पूरी तरह मंदी में नहीं है, लेकिन फिलहाल यह निश्चित रूप से धीमी चाल से आगे बढ़ रहा है।
