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प्रॉपर्टी बाजार : खरीदारों की बेरुखी से ब्रोकरों के सामने रोजी-रोटी का संकट :कमीशन पर निर्भर है पूरी कमाई : निवेशकों ने भी बनाई दूरी

खरीदारों की बेरुखी और निवेशकों की दूरी के कारण प्रॉपर्टी बाजार में मंदी छाई हुई है। रियल एस्टेट एजेंट और ब्रोकर मुख्य रूप से कमीशन पर निर्भर होते हैं। संपत्तियों के सौदे नहीं होने के कारण उनके सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट पैदा हो गया है।



रियल एस्टेट कारोबारियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में जमीन और मकानों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। इसका असर सीधे तौर पर बाजार की मांग पर पड़ा है।


MP - जबलपुर कभी शहर के रियल एस्टेट बाजार में सुबह से शाम तक ग्राहकों की चहल-पहल रहती थी। प्लॉट, मकान और फ्लैट देखने वालों की भीड़ लगी रहती थी और प्रॉपर्टी ब्रोकरों के फोन लगातार बजते रहते थे। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। जबलपुर में प्रॉपर्टी बाजार की रफ्तार धीमी पड़ने से सबसे ज्यादा परेशानी उन छोटे और मध्यम प्रॉपर्टी ब्रोकरों को हो रही है, जिनकी आजीविका पूरी तरह खरीदी-बिक्री के सौदों पर निर्भर है।

पूछताछ बहुत, सौदे कम

शहर के कई प्रॉपर्टी एजेंटों का कहना है कि ग्राहक प्रोजेक्ट देखने और जानकारी लेने तो आ रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय लेने से बच रहे हैं। कई लोग कीमतों में कमी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ बैंक लोन की बढ़ती ईएमआई और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेश का फैसला टाल रहे हैं।

एक प्रॉपर्टी ब्रोकर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले महीने में चार-पांच डील आसानी से हो जाती थीं, लेकिन अब दो-दो महीने तक एक भी रजिस्ट्री नहीं हो रही। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

कमीशन पर निर्भर है पूरी कमाई

प्रॉपर्टी ब्रोकरों की आय का मुख्य स्रोत कमीशन होता है। सौदा नहीं होने पर उनकी कमाई भी शून्य हो जाती है। शहर में सैकड़ों छोटे एजेंट ऐसे हैं जिनके पास कोई निश्चित वेतन नहीं है। उन्हें हर महीने किराया, ऑफिस खर्च, कर्मचारियों का वेतन और परिवार की जरूरतों को पूरा करना होता है।

बढ़ती कीमतें भी बनी वजह

रियल एस्टेट कारोबारियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में जमीन और मकानों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। इसका असर सीधे तौर पर बाजार की मांग पर पड़ा है।

निवेशकों ने भी बनाई दूरी

पहले जहां निवेशक बड़ी संख्या में प्लॉट और जमीन खरीदते थे, वहीं अब वे अन्य निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर नई कॉलोनियों और टाउनशिप परियोजनाओं पर भी दिखाई दे रहा है। कई प्रोजेक्ट्स में बुकिंग की गति धीमी पड़ गई है।

छोटे ब्रोकर सबसे ज्यादा प्रभावित

रियल एस्टेट बाजार में मंदी का सबसे बड़ा असर उन छोटे एजेंटों पर पड़ा है जो अकेले या छोटे स्तर पर काम करते हैं। कई ब्रोकरों ने अपने कार्यालयों का खर्च कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा दी है, जबकि कुछ ने किराए के ऑफिस छोड़कर घर से काम शुरू कर दिया है।

त्योहारों के सीजन से उम्मीद

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी त्योहारों और विवाह सीजन में बाजार में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। कई डेवलपर्स विशेष ऑफर और छूट की योजनाएं तैयार कर रहे हैं ताकि खरीदारों को आकर्षित किया जा सके।

बाजार की वर्तमान तस्वीर

• खरीदारों की संख्या में कमी
• पूछताछ अधिक, सौदे कम
• ब्रोकरों की आय प्रभावित
• निवेशकों का रुझान घटा
• नई परियोजनाओं की बिक्री धीमी
• त्योहार सीजन से कारोबारियों को उम्मीद

जमीनी हकीकत

जबलपुर का प्रॉपर्टी बाजार पूरी तरह ठप नहीं हुआ है, लेकिन उसकी रफ्तार निश्चित रूप से धीमी पड़ गई है। इसका असर सिर्फ बिल्डरों और डेवलपर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों ब्रोकरों और छोटे कारोबारियों तक पहुंच चुका है, जिनके घरों का चूल्हा इसी कारोबार से जलता है। बाजार में फिर से रौनक लौटने का इंतजार अब सबसे ज्यादा इन्हीं लोगों को है।