आखिरकार केरल पहुंचा मॉनसून, हफ्तेभर की हुई देरी, केरल में लगातार दो दिन से हो रही है भारी बारिश - Jai Bharat Express

Jai Bharat Express

Jaibharatexpress.com@gmail.com

Breaking

आखिरकार केरल पहुंचा मॉनसून, हफ्तेभर की हुई देरी, केरल में लगातार दो दिन से हो रही है भारी बारिश

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, अरब सागर में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने की वजह से मॉनसून का फ्लो थोड़ा डिस्टर्ब हुआ है. मॉनसून आम तौर पर 1 जून के आसपास केरल तट से टकराता है।



देश में मॉनसून की पहली बारिश केरल में ही होती है. इस बार ये 7 दिन लेट है. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे बारिश पर कोई असर नहीं होगा. मौसम विभाग ने इस बार मॉनसून के सामान्य रहने का अनुमान जताया है।




नई दिल्ली |मॉनसून ने केरल में दस्तक दे दी है, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि केरल में मॉनसून 1 जून की सामान्य तारीख से 7 दिन लेट है, अब इसके अगले तीन से चार दिनों में कर्नाटक और तमिलनाडु पहुंचने की संभावना है. एक हफ्ते बाद मॉनसून महाराष्ट्र और गोवा में दस्तक दे सकता है. वहीं देश की राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत में इस महीने के अंत में मॉनसून के पहुंचने की उम्मीद है।


भारतीय मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने मिडिया को बताया की केरल में लगातार दो दिन से भारी बारिश हो रही है, वेस्टरली विंड की स्ट्रेंथ भी अच्छी है. आज मानसून उत्तरी केरल के इलाकों में पहुंच गया है. साथ ही मॉनसून तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के भी कुछ हिस्सों में आया है. ये पुडुचेरी में भी पहुंच चुका है।


उन्होंने कहा कि उत्तर पूर्वी भारत के भी कई इलाकों में अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की उम्मीद है. हमें उम्मीद है कि अगले 48 घंटे में मॉनसून पूरे केरल को कवर कर लेगा. साथ ही, तमिलनाडु के कुछ और इलाकों में भी पहुंच जाएगा. अगले 1 से 2 दिन में पूर्वी भारत के इलाकों में भी तापमान में गिरावट का पूर्वानुमान है. मानसून का केरल पहुंचना, किसानों के लिए भी अच्छी खबर है. वह अब खरीफ सीजन के दौरान बुआई की तैयारी शुरू कर सकते हैं।


देश में मॉनसून की पहली बारिश केरल में ही होती है. इस बार ये एक हफ्ते लेट है. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे बारिश पर कोई असर नहीं होगा. मौसम विभाग ने इस बार मॉनसून के सामान्य रहने का अनुमान जताया है।


1 जून के आसपास केरल से टकराता है मॉनसून


मॉनसून आम तौर पर 1 जून के आसपास केरल तट से टकराता है. 26 मई को मौसम विभाग ने कहा था कि इस साल मॉनसून 4 जून तक केरल तट पर पहुंच सकता है. लेकिन साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से मॉनसून आने में  देरी हुई,भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, अरब सागर में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने की वजह से मॉनसून का फ्लो थोड़ा डिस्टर्ब हुआ है।


मानसून की स्थिति देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समंदर में ना जाने का अलर्ट पहले ही जारी कर दिया था. आईएमडी के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने और इसमें तेजी आने के कारण चक्रवाती हवाएं मानसून के केरल तट की तरफ आगमन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं. मानसून दक्षिण अरब सागर के शेष हिस्सों और मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों, पूरे लक्षद्वीप क्षेत्र, केरल के अधिकांश हिस्सों, दक्षिण तमिलनाडु के अधिकांश हिस्सों, कोमोरिन क्षेत्र के शेष हिस्सों, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण पश्चिम के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ गया है।


मई के मध्य में, आईएमडी ने कहा था कि मानसून 4 जून तक केरल में आ सकता है. स्काईमेट ने 7 जून को केरल में मानसून की शुरुआत की भविष्यवाणी की थी. आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 150 वर्षों में, केरल में मानसून की शुरुआत की तारीख व्यापक रूप से भिन्न है, सबसे पहले 1918 में 11 मई और 1972 में सबसे देरी से मानसून की एंट्री 18 जून को हुई थी।


मौसम विभाग ने इस साल जून से सितंबर के बीच देश में मॉनसून की बारिश सामान्य रहने का पूर्वानुमान जताया है. देश के अधिकतर हिस्सों में मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान है. हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत में इस साल मॉनसून की बारिश औसत से कम रह सकती है।